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Kumbh 2019: पहले दिन कायम रहीं ये परंपराएं तो इन टूटी परंपराओं ने खींचा ध्यान

प्रयागराज। कुंभ के पहले शाही स्नान पर सदियों से चली आ रहीं कई परंपराएं कायम रहीं तो कुछ परंपराएं टूटीं भी। संगम नोज यानी जहां पर गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है वहां पर परंपरागत रूप से अखड़े के साधु स्नान किया करते थे। प्रशासन इस बार इनका स्थान बदलने का प्रयास कर रहा था और परंपरा तोड़ने का प्रयास किया जा रहा था लेकिन प्रशासन की कोशिशों के बावजूद यह परंपरा कायम रही। यह परंपरा अंग्रेजी शासन में भी कायम थी, जिसे आजादी के बाद भी नहीं बदला जा सका।

शाही स्नान नोज पर ही करने की परंपरा है, लेकिन इस बार प्रशासन संगम के करीब ही एक नए घाट पर शाही स्नान करवाना चाहता था। अखाड़ा परिषद ने नए घाट पर शाही स्नान से साफ इनकार कर दिया। नतीजा यह रहा कि सदियों से चली आ रही संगम में स्नान की यह परंपरा बनी रही। इसके साथ ही अखाड़ों के स्नान का क्रम भी परंपरागत रूप से कायम रहा, लेकिन कुछ परंपराएं टूटीं भी।

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यह पहला मौका था जब, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखाड़ों के साथ किन्नर अखाड़े ने भी शाही स्नान में हिस्सा लिया, जिससे गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस के बालकांड की ‘देव दनुज किन्नर नर श्रेणी सादर मज्जहिं सकल त्रिवेणीं’ पंक्तियां जीवंत हो उठीं।

मेले में आकर्षण का केंद्र बने किन्नर अखाड़ा ने प्रयागराज में पहली बार शाही स्नान किया। इससे पहले इस अखाड़े ने 2016 के सिंहस्थ कुंभ में शाही स्नान किया था, लेकिन तीर्थराज प्रयाग की धरती पर यह पहला अवसर था जब ‘उपदेवता’ की उपाधि से नवाजे जाने वाले किन्नरों के अखाड़े ने परंपरागत अखाड़ों के साथ शाही स्नान में हिस्सा लिया।

मंगलवार सुबह पांच बजे किन्नर अखाड़ा के 150 से ज्यादा संत, महंत सेक्टर 12 संगम लोअर चौराहा शिविर से आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की अगुआई में जूना अखाड़े के लिए निकले। करीब 7 बजे जूना अखाड़े में पहुंचने पर किन्नरों को 21 रथ, छत्र व सिंहासन दिए गए। जूना अखाड़े के सबसे पीछे किन्नर अखाड़ा शाही स्नान के लिए रवाना हुआ। उनके आगे माई बाड़ा की महिला संन्यासी चल रही थीं। आगे-आगे रथ पर आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी और उनके पीछे बाकी संत-महंत चल रहे थे। घाट पहुंचने पर जूना के श्रीमहंत हरिगिरि ने सबका स्वागत किया। जिस तरह अन्य अखाड़ों ने पहले अपने ईष्टदेव को स्नान कराने के बाद डुबकी लगाई, उसी तरह किन्नर अखाड़े ने भी अपने ईष्ट महादेव के ‘अर्धनारीश्वर’ स्वरूप और बहुचारा माता को गंगा स्नान कराया।

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Source : indiatimes.com

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