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Kumbh 2019: धर्म की रक्षा के लिए महिला नागा साधुओं ने भी संभाल रखा है मोर्चा, कुंभ में भी पहुंची

प्रयागराज/दिनेश मिश्रा

हिंदू धर्म की रक्षा करने के लिए बने अखाड़ों में महिला साधकों के साथ महिलाएं भी नागा साधु हैं। वह गेरुए रंग का एक ही वस्त्र अपने शरीर पर बांध सकती है। देश में पांच हजार से ज्यादा महिलाएं भी इस समय जूना अखाड़े के साथ श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा में मौजूद हैं। एक हजार से ज्यादा महिला नागा साधुओं ने मकर संक्रांति के पहले शाही स्नान पर डुबकी भी लगाई। श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महासचिव ने महंत रविंद्रपुरी ने बताया कि आदिशंकराचार्य ने हिंदू धर्म को विदेशी अक्रामणकारियों के हमले से बचाने के लिए जिन अखाड़ों का गठन किया था, समय के साथ ज्यादा बदलाव तो नहीं हुआ लेकिन आधी दुनिया भी अब धर्म की रक्षा के लिए आगे आ गई है।

पुरुष साधकों को नागा साधु बनने के लिए जिन मापदंडों पर परखा जाता है वैसे ही मापदंड महिला साधकों को भी नागा साधु की दीक्षा बनने से पहले गुजरना पड़ता है। देश में पांच हजार से ज्यादा महिलाएं नागा साधु इस समय मौजूद है। एक हजार से ज्यादा महिला नागा साधु कुंभ स्नान के लिए भी आई हैं। 2013 में प्रयागराज में कुंभ के दौरान 250 महिला साधकों का नागा साधु की दीक्षा मापदंडों पर परखने के बाद दी गई थी। 70 साल की महिला नागा साधु महंत महिमा गिरी ने कहा कि सब भोलेनाथ की महिमा है। धर्म की रक्षा के लिए पुरुषों के साथ धर्म के नियमों का पालन करते हुए कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए महिला साधकों की संख्या पिछले एक दशक में बढ़ी है। घर-परिवार से वैराग्य होकर साध्वी बनने के बाद महिला नागा साधु भी मल्ल युद्ध की कला में माहिर होने के बाद ही आती है। एक दशक में महिला साधकों की संख्या में बढ़ोतरी के पीछे का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि महिलाओं पर सामाजिक व संसारिक अत्याचार की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद महिलाओं का रुझान इधर तेजी से बढ़ा है।

Source : indiatimes.com

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