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Kumbh 2019: शव को जलाते नहीं, ऐसे होता है नागा साधुओं का अंतिम संस्कार

हिंदू धर्म में आमतौर पर अग्नि से ही अंतिम संस्कार होता है। पारसी धर्म में पेड़ पर शव को टांग दिया जाता है जिससे पशु-पक्षी उसे खाकर तृप्त हो जाएं। मुस्लिम धर्म में शव को जमीन में दफन करके अंतिम संस्कार किया जाता है। नागा साधुओं को भी भू-समाधि देकर ही अंतिम संस्कार किया जाता है। साधुओं को पहले जल समाधि दी जाती थी, लेकिन नदियों का जल प्रदूषित होने के चलते अब जमीन पर समाधि दी जाती है। मुस्लिम धर्म में शव को सीधा लिटाकर दफना दिया जाता है लेकिन साधुओं को सिद्ध योग में की मुद्रा में बैठाकर ही भू-समाधि दी जाती है।

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अखाड़ों में भी चलता है लोकतंत्र
निर्मोही अखाड़ा हो या जूना अखाड़ा, इनके अलावा कई अन्य अखाड़ों में भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक खास प्रणाली है। यह अखाड़ा एक पूरा समाज है जहां साधुओं के 52 परिवारों के सभी बड़े सदस्यों की एक कमिटी बनती है। ये सभी लोग अखाड़े के लिए सभापति का चुनाव करते हैं।

एक बार चुनाव होने के बाद यह पद जीवनभर के लिए चुने हुए व्यक्तियों का हो जाता है। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज हैं। उनकी नियुक्ति 1998 में हुई थी। जूना अखाड़े में इस समय 52 मढ़ी है। इसमें पुजारी, कोठारी, कोतवाली, भंडारी, महंत, श्री महंत के अलावा 42 महामंडलेश्वर भी हैं। किसी विषय पर कोई निर्णय लेने के लिए 13, 14 व चार मढ़ी ही फैसला करते हैं।

साधना के लिए साधनों में हुआ बदलाव
समय के साथ अखाड़ों में साधना के लिए साधनों में बदलाव भी हुआ है। प्रयागराज में 89 में लगे कुंभ के बाद हाथी-घोड़ा,ऊंट, बैलगाड़ी से पेशवाई पर प्रतिबंध लगने के बाद अब वाहनों का प्रयोग भी होने लगा है। भगवाधारी साधु बाइक चलाते जहां नजर आ जाएंगे वहीं नागा साधु भी अखाड़े की कार चलाते दिखेंगे।

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Source : indiatimes.com

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