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Chandra Grahan 2019: सूतक के बाद करने चाहिए ये उपाय, मिलेगा लाभ

इस साल का पहला चंद्रग्रहण दिनांक 21 जनवरी को पड़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य जब एक ही रेखा में आते हैं तब चांद पर पृथ्वी की प्रच्छाया पड़ती है यह घटना चंद्रग्रहण कहलाती है। चंद्रग्रहण पूर्णिमा को पड़ता है। भारतीय समयानुसार यह चंद्रग्रहण, पौष पूर्णिमा 21 जनवरी को खग्रास चन्द्रग्रहण लगेगा।

ग्रहण 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगा। हालांकि ग्रहण का स्पर्शकाल सुबह 10 बजकर 11 मिनट पर शुरू होकर 11 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगा।

सूतक लगने का समय
चंद्रग्रहण के प्रभाव के साथ ही इस दौरान लगने वाले सूतक का भी विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण में 9 घंटे पहले सूतक का प्रभाव शुरू हो जाता है। इस हिसाब से रात 21 जनवरी को रात के 12 बजे से ही सूतक लग जाएगा।

Chandra grahan time: 21 जनवरी को लग रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण

क्या है सूतक?
सूतक से अर्थ है खराब समय या ऐसा समय जब प्रकृति ज्यादा संवेदनशील होती है , ऐसे में किसी अनहोनी के होने की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए ऐसे समय में सावधान रहना चाहिए और ईश्वर का ध्यान करना चाहिए। वैसे तो हम अपनी दिनचर्या में कुछ नियमों का पालन करते हैं लेकिन सूतक काल में हमें कुछ खास बातों का ध्यान रखाना चाहिए।

सूतक के समय क्या न करें
सूतक काल में नए काम की शुरुआत करने से बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल अच्छा समय नहीं माना जाता है, अत: सूतक में भोजन नहीं करना चाहिए। हालांकि गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग, बच्चे और बीमार व्यक्तियों पर यह नियम लागू नहीं होता। वह दूध, फल, जूस या सात्विक भोजन ले सकते हैं | भगवान की पूजा-अर्चना नहीं करनी चाहिए। इसलिए मंदिरों के पट ग्रहण के दौरान बंद कर दिए जाते हैं।

तुलसी के पौधे को भी नहीं छूना चाहिए। भोजन नहीं पकाना चाहिए। यदि कुछ विशेष भोजन पहले से रखा है, जो आप फेंकना नहीं चाहते हैं तो उसमे सूतक से पहले तुलसी की पत्तियां डाल देनी चाहिए। सूतक में सिलाई कढ़ाई का काम नहीं करना चाहिए। ग्रहण को कभी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। व्यसन, बुरे काम, बुरे विचार और झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि इस समय किए गए बुरे कार्य का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

सूतक खत्म होने के बाद करने चाहिए यह उपाय

मान्यता है कि ग्रहण के बाद घी और खीर से हवन आदि करने से से लाभ होता है। यदि लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो उसमें आराम मिलता है। ग्रहण के बाद पीने के पानी को बदल लेना चाहिए। कई वैज्ञानिक शोधों से भी पता चलता है कि ग्रहण के समय मनुष्य की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती। यदि पेट में दूषित अन्न या पानी गया तो बीमारियां हो सकती हैं। सूतक के बाद मंदिरों के पट खोल कर भगवान को भी स्नान करा कर पूजा-अर्चना की जाती है। चंद्र देव की आराधना करना चाहिए। यदि चंद्रमा कमजोर स्थिति में है तो ‘ॐ चन्द्राय: नमः’ मंत्र का जाप करने से लाभ होता है। प्राणायाम और व्यायाम करना चाहिए, सोच को सकारात्मक रखना चाहिए, धार्मिक पुस्तक पढ़नी चाहिए। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद घर में शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति और ब्राह्मणों को अनाज का दान करना चाहिए।

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गर्भवती महिलाओं को रखना है खास ध्यान


हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को मन में अच्छे विचार लाने चाहिए। इस दौरान वातावरण में उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव गर्भ में पल रहे उनके शिशु पर पड़ सकता है। हिन्दू धर्म में ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, काटना या छीलने जैसे कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बच्चों के अंगों को क्षति पहुंच सकती है।

भारत में नहीं दिखेगा ‘ब्लड रेड मून’
इस समय चांद की स्थिति के चलते उस पर लालिमा बिखरी नजर आती है, इसलिए इसे रेड मून भी कहा जाता है। हालांकि यह चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। यह मध्य प्रशांत महासागर, उत्तरी/दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका में दिखाई देगा। भारत में दिन होने के चलते यह इक्लिप्स नजर नहीं आएगा। जनवरी के पहले सप्ताह में ही सूर्यग्रहण भी हुआ था, लेकिन यह भी भारत से देखने को नहीं मिला था।

Source : indiatimes.com

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