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सप्ताह के व्रत और त्योहार 21 से 27 जनवरी, जानें किस दिन कौन सा व्रत और उनके महत्व

डॉ. अश्विनी शास्त्री

इस सप्ताह का शुभारंभ पौष मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि यानी पौष पूर्णिमा के साथ हो रहा है। इससे अगले ही दिन यानी मंगलवार से माघ मास का कृष्ण पक्ष आरंभ हो जाएगा, जो आगामी 4 फरवरी को मौनी अमावस्या वाले दिन समाप्त हो जाएगा। हमारे शास्त्रों में माघ, कार्तिक और वैशाख को बहुत ही पुनीत मास माना जाता है। इसी महीने प्रयाग में एक महीने तक कल्पवास किया जाता है। और आजकल तो वैसे भी प्रयाग में कुंभ का मेला चल रहा है। इस कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस सप्ताह पौष पूर्णिमा, सौभाग्य सुंदरी व्रत, गणेश संकष्ट चतुर्थी, शीतला षष्ठी व्रत आदि का आयोजन किया जायेगा।

पौष पूर्णिमा/माघ स्नान: (21 जनवरी, सोमवार)

पौष पूर्णिमा वाले दिन से ही माघ स्नान शुरू हो जाते हैं। माघ महीने में पुण्यतोया नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। कहा गया है कि मृत्युलोक में जिन्हें स्वर्गप्राप्ति की इच्छा है, उन्हें माघ के पूरे महीने में नदियों में स्नान करना चाहिए। यदि किन्हीं कारणों से पूरे महीने संभव न हो सके तो किसी एक दिन या पूर्णिमा वाले दिन ही नदियों में स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि माघ में स्नान करने वालों को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में माघ मास का महत्व बताते हुए कहा गया है कि माघ को छोड़कर बाकी महीनों में स्नान, दान और धार्मिक कृत्यों से भगवान इतने प्रसन्न नहीं होते, जितने माघ में शास्त्रोक्त पुण्य कर्मों से प्रसन्न होते हैं।

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मनाई जाती है शाकंभरी जयंती

पौष पूर्णिमा से प्रयागराज में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले के अंतर्गत तीन बड़े स्नानों का विशेष महत्व बताया गया है। ये स्नान पौष पूर्णिमा, माघ अमावस्या और माघ पूर्णिमा के दिन आयोजित होते हैं। इन तीनों ही अवसरों पर पुण्यतोया नदियों में लाखों लोग आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं। संयोगवश इन दिनों प्रयाग में कुंभ का आयोजन भी चल रहा है जिसमें लाखों लोग स्नान और कल्पवास के लिये वहां पहुंचे हुए हैं। माघ मास में प्रयागराज में स्नान का महत्व बताते हुए कहा गया है कि माघ मास में प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम होता है। इसलिए इस महीने में प्रयाग में रहकर स्नान करने वाले को स्वर्ग की प्राप्ति होती है, इसमें कोई भी संदेह नहीं है। इसी दिन कई स्थानों पर शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है।

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संकटा चौथ/संकष्ट चतुर्थी: (24 जनवरी, गुरुवार)

माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी तिथि को संकटा चौथ कहा जाता है। इस तिथि को वक्रतुंडी चतुर्थी या तिलकूट चतुर्थी भी कहा जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान गणेश का व्रत रखने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन तिलों के दान का भी विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन तिल का दान देने से आराधक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

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Source : indiatimes.com

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