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इन 4 चीजों के दान की वजह से मारा गया कर्ण, हार गए कौरव

महाभारत का महायोद्धा कर्ण जिसने जीवन में कभी किसी से कुछ दान नहीं लिया, स्वयं दान देने की वजह से मारा गया। परिस्थतियां ही कुछ ऐसी बनती गई कि कर्ण को महाभारत युद्ध से पहले 4 चीजों का दान करना पड़ा। ये 4 ऐसी चीजें थीं कि इनके जाने का मतलब मृत्यु था। यह जानते हुए भी कर्ण ने दानवीर होने का परिचय दिया और रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुआ।

ब्राह्मण वेषधारी इंद्र को दिया यह दान

महाभारत के महायुद्ध में जब कर्ण को कौरवों का सेनापति बनाया गया तो देवराज इंद्र अर्जुन की ओर से चिंतित हो गए क्योंकि कर्ण के पास जो कवच और कुंडल थे उसके रहते कर्ण को मारा नहीं जा सकता था। अर्जुन की रक्षा के लिए एक दिन दोपहर के समय जब कर्ण सूर्यदेव की पूजा कर रहे थे तब इंद्र ब्राह्मण वेष बनाकर उनके सामने आए। कर्ण का नियम था कि सूर्यदेव की पूजा के बाद वह दान दिया करते थे। देवराज इंद्र ने कर्ण से दान में कर्ण से उनका कवच और कुंडल मांग लिया जो उन्हें सूर्यदेव से जन्म के साथ ही मिला था।

अर्जुन के अलावे दूसरे पाण्डव भाईयों को न मारने का दिया वचन

 

कुंती युद्ध से पहले कर्ण के पास आई और बताया कि पाण्डव उनके भाई हैं। मित्रता के बंधन में बंधे कर्ण ने दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा और कुंती को यह दान दिया कि वह केवल अर्जुन का वध करेगा। कुंती हमेशा पांच पुत्रों की माता रहेगी। अगर अर्जुन मारा गया तो वह पाण्डवों के साथ आ जाएगा।

 निहत्थे भीम को जीवन दान दिया

महाभारत युद्ध के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब भीम और कर्ण के बीच महासंग्राम छिड़ गया। इस संग्राम में भीम जब निहत्थे हो गए तो कर्ण उसे मार सकते थे लेकिन माता कुंती को दिए वचन दान के कारण भीम को जीवन दान दे दिया।

मित्रता की लाज के लिए अमोघ अस्त्र छोड़ा

कवच कुंडल दान देने के बाद जब इंद्र ने वरदान मांगने को कहा तो कर्ण ने इंद्र से अमोघ अस्त्र मांग लिया जिससे अर्जुन को मार सके। इस अस्त्र के रहते अर्जुन कर्ण को पराजित नहीं कर सकता था। लेकिन कृष्ण ने घटोत्कच को रणभूमि में लाकर ऐसी चाल चली कि दुर्योधन घबरा गया। दुर्योधन ने अमोघ अस्त्र का प्रयोग घटोत्कच पर करने के लिए कहा। कर्ण जानता था कि इस अस्त्र का प्रयोग करना अपना जीवन दान करना होगा। लेकिन मित्रता की लाज रखने के लिए कर्ण ने अमोघ अस्त्र का प्रयोग घटोत्कच पर कर दिय और स्वयं रणभूमि में युद्ध करता हुआ अर्जुन के हाथों वीरगति को प्राप्त हुआ।

Source : indiatimes.com

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