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जानिए क्‍यों एक अफसर बनने से कठिन है नागा बनना

प्रयागराज,
आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए ही अखाड़ों का गठन किया था। यह परंपरा आज भी जारी है। अखाड़ों में संन्यासी के तौर पर प्रवेश पाना किसी सरकारी अफसर की नौकरी हासिल करने से भी मुश्किल है। संन्यासी बनने की एक लंबी और मुश्किल प्रक्रिया है। आने वालों को पहले अखाड़ों का नियम-कानून समझना होता है। धैर्य की परीक्षा ली जाती है। कभी-कभी तो 10 से ज्यादा साल का इंतजार करवाया जाता है। इसके बाद आधार कार्ड, वोटर आईडी और एक गारंटर की जरूरत पड़ती है। फिर नए संन्यासियों की गोपनीय जांच कराई जाती है। सभी स्टेज में सफल होने के बाद नागा संन्यासी को दीक्षा दी जाती है। फिर उनके नाम का एक प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसमें अखाड़े की मुहर होती है।

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शास्त्र के साथ शस्त्र भी
श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के नागा संन्यासी महेशानंद गिरी बताते हैं, ‘नागा संन्यासियों को शास्त्र के साथ शस्त्रों की ट्रेनिंग भी दी जाती है। मार्शल आर्ट भी सिखाई जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि जरूरत पड़ने पर वे धर्म की रक्षा कर सकें। उन्हें एक अच्छे टीचर के तौर पर भी तैयार किया जाता है, ताकि लोगों को कथा के जरिए जागरूक कर सकें।’ आपराधिक बैकग्राउंड के लोगों को रोकने के लिए साल 2000 के बाद से अखाड़ों ने नागा बनाने के लिए सरकारी आईडी को जरूरी कर दिया था।

करते हैं 17 श्रृंगार
नागा संन्यासियों का एक रहस्य इनका श्रृंगार भी है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, लेकिन नागा संन्‍यासी 17 श्रृंगार करते हैं। यह श्रृंगार अपने आराध्य को रिझाने के लिए होता है। भस्म नागा सन्यासियों का सबसे बड़ा आभूषण है और इसके लिए ‘काम’ को दबाया जाता है। इसके साथ ही रुद्राक्ष, काजल, माला, कंठी आदि सन्यासियों के आभूषण हैं, जिन्हें वे विशेष अवसरों पर धारण करते हैं। शाही स्नान भी एक ऐसा ही अवसर है।

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Source : indiatimes.com

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