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चाणक्य नीतिः ऐसे लोगों का धनवान और सुंदर दिखना बेकार है

गुरु चाणक्य ने मनुष्य को जीवन से जुड़े हुए कई उपदेश दिए हैं। चाणक्य की बातें हमेशा जीवन को अनुशासित मार्ग पर ले जाने वाली होती है। चाणक्य की नीतियां आज भी जीवन में लागू करने वाली हैं। उनकी नीतियों से मानव सफल और सुगमता से अपना जीवन व्यतीत कर सकता है। चाणक्य एक स्वाभिमानी, संयमी, तेज दिमाग और निश्चित इरादे रखने वाले युग पुरुष थे। वह ‘सादा जीवन उच्च विचार’ के समर्थक थे। चाणक्य के प्रत्येक श्लोकों में कुछ न कुछ खास शिक्षा निहित होती है। जिनसे मानव मात्र को सफल जीवन की प्राप्ति हो सकती है।

चाणक्य ने अपने एक खास श्लोक में बताया है कि मनुष्य के गुण उसके रूप को, शील कुल को, सिद्धि विद्या को और भोग धन को भूषित करता है। चाणक्य के अनुसार जीवन को सरलता से जीना चाहिए। उनका व्यक्तित्व सभी के लिए अनुकरणीय एवं आदर्श है।

गुण से रूप सुशोभित होता है

गुणोभूषतेरूपयतेरूपंशीलंभूषयतेकुलम्।।
सिद्धिर्भूषयतेविद्याभोगोभूषयतेधनम्।।

चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य के अंदर निहित गुणों से ही उसकी शोभा सुसज्जित होती है। मनुष्य जीवन पर्यंत अपने बाहरी रूप और साज-सज्जा की चिंता में लगा रहता है। जबकि उसकी असली शोभा तो गुणों से जानी जाती हैं। मनुष्य का रूप उसके अच्छे गुणों से ही जाना जाता है। गुणहीन मनुष्य की सुंदरता व्यर्थ है।

शील होने पर ही कुल का अलंकरण है

शील से अर्थ उत्तम स्वभाव, आचरण, नैतिकता, शुचिता, ईमानदारी, दान, दया, वैराग्य, आदि से है। चाणक्य के अनुसार शील कुल को अलंकृत करता है। शील मनुष्य का सबसे आभूषण माना जाता है। इसलिए अपने आचरण में मधुरता, सरसता रखने से ही मनुष्य का कुल सुशोभित होता है। शील मनुष्य के कुल में चार चांद लगाने वाला होता है।
शीलरहित मनुष्य के कुल की आलोचना होती है।

सिद्धि से ही विद्या की शोभा है


चाणक्य के अनुसार सिद्धि विद्या को सुसज्जित करने में महत्वपू्र्ण भूमिका निभाती है। सिद्धि प्राप्त होने के बाद ही मनुष्य को असली ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। आलौकिक शक्तियों से रहित, मोक्ष की ओर ले जाने वाली और बुद्धि से रहित विद्या का अर्जन बेकार है।

 धन की असली शोभा सदुपयोग से है

चाणक्य कहते हैं यदि किसी व्यक्ति के पास बेशुमार दौलत है लेकिन वह उसका सदुपयोग करने में असफल है तो उसकी सारा धन व्यर्थ है। अर्थात् सही जगह धन का भोग न किया जाय तो उस धन का कोई मोल नहीं होता है, सही भोग के बिना धन का नष्ट होना निश्चित है। जिस मनुष्य के पास धन है उसे उसका सही इस्तेमाल करना चाहिए। सदुपयोग के बिना धन किसी काम का नहीं है।

Source : indiatimes.com

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