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पढ़ाई में मन नहीं लगता है तो चाणक्य की इस नीति को एक बार जरूर पढ़ें

जीवन को केवल एक चीज से बेहतर बनाया जा सकता है और वह है पढ़ाई। पढ़ाई के जरिए आप रंक से राजा बन सकते हैं और दुनिया को आप एक बेहतर समाज दे सकते हैं। अर्थशास्त्र और नीतियों के महान ज्ञाता आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में भी इसके बारे में बताया है। उन्होंने शिक्षा और अपनी नीतियों के माध्यम से ही एक साधारण बालक सफल शासक बनाया था। आइए जानते हैं चाणक्य की नीति के बारे में…

विद्वान की ही होती है प्रशंसा

विद्वान् प्रशस्यते लोके विद्वान् गच्छति गौरवम्।
विद्या लभते सर्वं विद्या सर्वत्र पूज्यते।
आचार्य चाणक्य ने अपने श्लोक के माध्यम से कहा है कि विद्या से ही आप विद्वान बन सकते हैं। संसार में हमेशा विद्वान की ही प्रशंसा होती है। विद्वान् को ही मान-सम्मान समेत सबकुछ प्राप्त होता है। अगर आपको सबकुछ प्राप्त करना है तो विद्या को अर्जित करें।

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विद्याहीन को नहीं मिलता महत्व

रूपयौवनसंपन्ना विशाल कुलसम्भवाः।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः।
श्लोक में आगे कहा गया है कि आप चाहें रूप संपन्न या फिर यौवन संपन्न अगर आप विद्याहीन हैं तो रूप और यौवन का कोई महत्व नहीं है। वहीं गरीब व्यक्ति विद्या को ही सबकुछ मानता है तो समाज में उसको ही सम्मान मिलता है। वह जो चाहे प्राप्त कर सकता है।

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तभी होगा समाज में सम्मान

अगर आप विशाल कुल में ही पैदा क्यों न हुए हों, अगर विद्या का सम्मान करते हैं तो समाज में आपका सम्मान होगा। अन्यथा विशाल कुल में पैदा होना आपके लिए कोई फायदेमंद नहीं होगा।

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भविष्य हो सकता है तबाह

जीवन में विद्यार्थी जीवन ही सबकुछ होता है। अगर इस जीवन को सहनशीलता से निभाया जाए तो जीवन संवर जाता है अन्यथा थोड़ी भी भूल चूक होने पर भविष्य तबाह हो सकता है। इसके लिए आपको विद्या में मन लगाना जरूरी होता है।

Source : indiatimes.com

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