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इसलिए प्रसिद्ध है भारत का एकमात्र मेंढक मंदिर, तंत्रवाद के लिए है मशहूर

अद्भुत संस्कृति से भरा हुआ है भारत में आपको हजारों रंग देखने को मिल जाएंगे। इन्ही रंगों में आपको कई अजीबोगरीब मंदिर भी मिलेंगे, जिनके बारे में पढ़कर या देखकर आप हैरान हो जाएंगे। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज‍िले के ओयल में भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मेंढक की पूजा की जाती है। बताया जाता है कि यह मंदिर मांडूक तंत्र पर आधारित है और शिवजी मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

शिवलिंग बदलता है रंग

करीब 200 साल पुराने इस मेंढक मंदिर का निर्माण सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए करवाया गया था। मेंढक मंद‍िर के श‍िवल‍िंग की खास बात यह है कि इस श‍िवल‍िंग का रंग बदलता है। यहां खड़ी नंदी की मूर्ति है, जो आपको कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगी।

गणेशजी के इस रूप को देखकर भक्त रह जाते हैं हैरान

ऐसा है मंदिर

मंदिर की दीवारों पर तांत्रिक देवी-देवताओं के मूर्तियां लगी हुई हैं। मंदिर के अंदर भी कई विचित्र चित्र भी लगे हुए हैं, जो मंदिर को शानदार रूप देते हैं। मंदिर के सामने ही मेंढक की मूर्ती है और पीछे भगवान शिव का पवित्र स्थल है। जो एक गुंबद के साथ चौकोर आकार में बना हुआ है।

आखिर अयोध्या से 15 किमी. दूर क्यों नहीं जाती किसी की नजर

तंत्रवाद पर आधारित है मंदिर

नर्मदेश्वर मंदिर का वास्तु कपिला के एक महान तांत्रिक ने की थी। तंत्रवाद पर आधारित इस मंदिर का वास्तु सरंचना बहुत आकर्षक है, जिस देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।

संसद जैसा दिखने वाला यह मंदिर कहलाता था तांत्रिक यूनिवर्सिटी

ओयल साम्राज्य ने करवाया था स्थापित

पुरानी ऐतिहासिक कहानी को समेटे गुए यह मंदिर ओयल शैव साम्राज्य का एक केंद्र हुआ करता था और इस मेंढक मंदिर को भी ओयल शासकों ने स्थापिक करवाया था। यहां के पीठासीन भगवान शिवजी हैं इसलिए इसे उत्तर प्रदेश के नर्मदेश्वर मंदिर भी कहा जाता है।

इस मंदिर में होती है गोबर गणेश की पूजा, झटपट होती है मनोकामना पूरी

होती है मनोकामना पूरी

मेंढक मंदिर में हर रोज हजारों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं लेकिन दीपावली और महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा देखने लायक होता है। मान्यता है कि मंदिर में पूजा करने पर हर किसी की मनोकामना पूरी होती है और विशेष फलों की प्राप्ति होती है।

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Source : indiatimes.com

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